CG Yuva Aayog

हमसे संपर्क करें

  • सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पिच न. 02, जी. ई. रोड, रायपुर छत्तीसगढ़ पिन: 492001 पता
  • 0771 - 2263070 फ़ोन -फैक्स न.
  • info@cgyuvaayog.com ईमेल आईडी

छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाएं

छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाएं

 संजू देवी
संजू देवी

 संजू देवी छत्तीसगढ़ की एक प्रेरणादायक कबड्डी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कोरबा के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारत को महिला कबड्डी विश्व कप 2025 (ढाका) जिताने में अहम भूमिका निभाई और टूर्नामेंट की 'मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर' (MVP) बनीं, वह आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं और गरीबी, कम संसाधनों के बावजूद संघर्ष कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. 

संजू देवी छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के केराकछार गांव की रहने वाली हैं और एक आदिवासी परिवार से आती हैं.गरीबी और खेती-किसानी के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेतों में मजदूरी भी करनी पड़ती थी, जिससे प्रैक्टिस के लिए समय निकालना मुश्किल होता था.स्थानीय कोचों और शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बिलासपुर की आवासीय कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण का अवसर मिला, जहाँ कोच दिल कुमार राठौर ने उन्हें तराशा. 

करियर और उपलब्धियां:

एशियन चैंपियनशिप: मार्च 2025 में ईरान में हुई छठी महिला एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

विश्व कप 2025: ढाका में हुए महिला कबड्डी विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की जीत में निर्णायक रहीं; फाइनल में अकेले 16 अंक बनाए और 'मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर' (MVP) का खिताब जीता.

अंतर्राष्ट्रीय पहचान: छत्तीसगढ़ की पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है और अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक बिखेरी है. 


मृणाल विदानी
मृणाल विदानी

 वरिष्ठ पत्रकार उत्तरा विदानी की बेटी मृणाल विदानी ने विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी विलक्षण प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए पूरे प्रदेश में महासमुंद का नाम रोशन किया है। मृणाल को उनके अद्भुत नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘युवा रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री के हाथों यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त कर नगर आगमन पर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष हुलसी जितेंद्र चंद्राकर ने अपनी नारी शक्ति महिला टीम के साथ मृणाल के निवास पहुँचकर उनका आत्मीय अभिनंदन किया और शाल व गुलदस्ता भेंट कर उन्हें प्रोत्साहित किया।

मृणाल विदानी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्तुओं जैसे कोसे (रेशम), चेंच भाजी और गोबर खरसी की राख का उपयोग कर फॉरेंसिक सामग्री विकसित की है। उनके इस अनूठे और प्रेरक शोध की महत्ता को देखते हुए भारत सरकार द्वारा इसे कॉपीराइट भी प्रदान किया गया है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से फॉरेंसिक साइंस जैसे जटिल क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करना मृणाल की दूरदर्शी सोच और कड़ी मेहनत का परिणाम है।


श्री अमित यादव
श्री अमित यादव

 


सुश्री शिल्पा साहू
सुश्री शिल्पा साहू

 महिला सश्क्तिकरण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य

पिछले कई वर्षों से शिल्पा साहू समाज के जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं अधिकारों को लेकर प्रभावी कार्य किया है। पीरियड्स अवेयरनेस के क्षेत्र में उनके योगदान को विशेष सराहना मिली है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर उन्होंने मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक संकोच, भ्रांतियों और गलत धारणाओं को तोड़ने का कार्य किया, जिससे अनेक बालिकाओं की शिक्षा बाधित होने से बची और महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में सकारात्मक बदलाव आया।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रचार के लिए प्रयास
इसके साथ ही सुश्री शिल्पा साहू ने देश के विभिन्न राज्यों में भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिली। राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से किए गए उनके कार्यों को पूर्व में राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है, जो उनके सामाजिक समर्पण का प्रमाण है।
 
कांकेर कर्मभूमि, लक्ष्य छत्तीसगढ़
वर्तमान में वे कांकेर जिले से जनपद सदस्य के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं युवा सहभागिता जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। संगठनात्मक स्तर पर भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय है। वे छत्तीसगढ़ साहू समाज युवा प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष हैं तथा हाल ही में उन्हें प्रदेश कन्या शक्ति सहसंयोजक का दायित्व सौंपा गया है। इस भूमिका में वे प्रदेशभर में बालिकाओं और युवतियों के अधिकारों, नेतृत्व एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से अनेक युवतियों को सामाजिक मंच, नेतृत्व के अवसर और आत्मविश्वास मिला है, जिससे वे स्वयं निर्णय लेने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम हो सकी हैं। युवारत्न पुरस्कार से सम्मानित होकर शिल्पा साहू ने यह सिद्ध किया है कि निरंतर प्रयास, ईमानदारी और जमीनी कार्य से समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है।
 
कांकेर जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में इस सम्मान को लेकर हर्ष और गर्व का माहौल है। आमजन को विश्वास है कि शिल्पा साहू आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ समाज सेवा करते हुए जिले और राज्य का नाम रोशन करती रहेंगी।
 


पीयूष जायसवाल
पीयूष जायसवाल

शंकुतला विद्यालय रामनगर में कक्षा नवमीं में पढ़ने वाले पीयूष जायसवाल दुनिया के 'यंगेस्ट साइंटिस्ट" बन गए हैं। पीयूष ने वेग रहस्य पर शोध कर दुनिया के शीर्ष रिसर्च सेंटर से पीएचडी सर्टिफिकेट और रिसर्च लेवल अप्रूवल सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। ब्रह्मांड जैसे जटिल विषय पर किताब लिखने वाले छात्र पीयूष जायसवाल ने अब सबसे कम उम्र में साइंटिस्ट बनने का गौरव हासिल किया है। आठवीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए महज 12 वर्ष एक माह की आयु में ही यह कर दिखाया है।
अब तक यह रिकार्ड वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम था जिन्होंने 17 वर्ष की उम्र में शोध किया था। वाशिंगटन स्थित सबसे बड़े रिसर्च सेंटर आइजेएसईआर (इंटरनेशनल जनर्ल्स आफ साइंटिफिट एंड इंजीनियरिंग रिसर्च) ने पीयूष जायसवाल के रिसर्च को मान्यता प्रदान की है। पीयूष ने बीते अक्टूबर माह में अपने 20 पन्नो के शोध को मेल के जरिये आइजेएसईआर के पास भेजा था। संस्था ने अपने अनुभवी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से कई चरणों में तथ्यात्मक जांच कराने के बाद पीयूष के शोध को पीएचडी सर्टिफिकेट एवं रिसर्च लेवल अप्रूवल सर्टिफिकेट दे दिया ।
इस शोध के जरिए पीयूष जायसवाल ने बताया कि ब्रह्मांड का अंत भी निश्चित है। उन्होंने हबल थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए बताया कि ग्रहों की दूरियां बढ़ती जा रही हैं। एक समय बाद वे फिर से सिकुड़ने लगेंगे। इसके लिए मैग्नेटिक थ्योरी का उदाहरण दिया. उन्होंने शोध में बताया कि ग्रह जैसे ही दूर होंगे, उनके अंदर मौजूद गुरुत्वाकर्षण क्षमता बढ़ेगी, जो एक दूसरे ग्रह को आपस में खींचकर ब्रह्मांड को तबाह कर देगी।पीयूष ने अपने 20 पन्नो के शोध को मेल के जरिए वाशिंगटन डीसी के आईजीएसईआर (इंटरनेशनल जनरल्स आफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग रिसर्च ) को अक्टूबर में भेजा था, तब उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उनके शोध को मान्यता मिल जाएगी। 27 दिसंबर को संस्था ने पीयूष के शोध को मान्यता देते हुए सर्टिफिकेट मेल कर दिया। यह भी लिखा कि बहुत जल्द ही पीएचडी की स्कालर और साइंटिस्ट की उपाधि भी उन्हें दी जाएगी।
दुनिया के सबसे बड़े इस रिसर्च सेंटर में किसी भी शोध को मान्यता देने से पहले अपने अनुभवी साइंटिस्ट व रिसर्चर से कई चरणों की तथ्यात्मक पड़ताल करवाती है। निर्धारित मापदंड व पूर्व में कहीं इस शोध का जिक्र तो कहीं नहीं हुआ है। इसकी पड़ताल करने में एक माह का समय लग गया। आखिरकार संस्था ने 27 दिसंबर को इस नन्हें साइंटिस्ट की मेहनत पर मुहर लगा ही दी। संस्था के अधिकृत ई-मेल आईडी से इसकी पुष्टि की गई है। उसने 8 मार्च को साइंटिस्ट का सर्टिफिकेट भेज प्रकाशन की सहमति भी दी है।
नानी की कहानी में सुना था शेष नाग उठाया है धरती को,रहस्य जानने की ललक ने बना दिया साइंटिस्ट- पियूष की मां सुनीता बताती है कि बचपन मे ब्रम्हांड की कहानी सुनता था तब उसे बताया जाता था कि धरती शेष नाग ने सर पर उठा रखा है । इसी रहस्य को जानने में जुट गया। साल भर पहले पीयूष ने ब्रह्मांड पर फुलफिल आफ कासमास नाम की पहली किताब लिखी थी। इस किताब को लिखने के बाद ब्रह्मांड के उन रहस्यों को जानने की उनकी जिज्ञासा बढ़ी और फिर उस दिशा में शोध शुरू कर दिया।
डा. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाले इस मेहनती छात्र ने मन में उठ रहे सवालों को ढूंढ़ने 20 से ज्यादा सोर्स से तलाश भी शुरू की।जवाब नहीं मिला तो खुद शोध शुरू किया। कई महान शोधकर्ताओं द्वारा तैयार थ्योरी पर आधारित मेथड से ट्रायल शुरू कर अपने सवालों के जवाब ढूंढ़ते गए और तैयार कर लिया वेग रहस्य पर शोध।
20 पन्नो के रिसर्च में ब्रह्मांड के इन रहस्यों को बताया
 
1- ब्रह्मांड की शुरुआत
ब्रह्मांड की शुरुआत सूक्ष्म तत्व से हुई- शरीर के सेल से तुलना करते हुए एसस्पेलन किया, फिर शारीरिक विकास की तरह अपने आपको विकसित किया।
2- ब्रह्मांड का अंत भी सुनिश्चित है यह बताया
साबित करने के लिए, हबल थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए बताया कि ग्रहों की सुनिश्चित दूरियां बढ़ती जा रही हैं। एक समय बाद वे फिर से सिकुड़ने लगेंगे। इसके लिए मैग्नेटिक थ्योरी का उदाहरण दिया। उन्होंने शोध में बताया कि ग्रह जैसे ही दूर होंगे, उनके अंदर मौजूद गुरुत्वाकर्षण क्षमता बढ़ेगी, जो एक दूसरे ग्रह को आपस में खींचकर ब्रह्मांड को तबाह कर देगी।
3-खगोलीय घटना के बाद कास्मिक रेडिएशन बढ़ेगा
ग्रहों की सतह गर्म होंगी, गुरुत्वाकर्षण भी बढ़ेगा, जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी का हवाला देकर बताया कि सतह को ठंडा करने गुरुत्वाकर्षण बढ़ता जाएगा। इसी शक्ति के वजह से दोनों ग्रह के आपस में टकराने की शत फीसदी संभावना बनेगी।
4-समय भी रुक सकता है
समय कैसे रोका जा सकता है इसके रहस्य को बताते हुए शोध में लिखा है कि प्रकाश की गति से चलने पर समय धीमा हो सकता है। ये पहले भी उल्लेखित है पर पीयूष ने बताया कि प्रकाश की गति से भी तेज चले तो समय रुक जाएगा।
5-ग्रह के नफा नुकसान
किसी भी ग्रह या तारों पर तत्वों की क्षमता बढ़ गई या कम हुई तो उस ग्रह के नफा नुकसान को भी शोध में बताया है। ह्यूमन टेक्नालाजी से इसे नियंत्रित करने का उपाय भी बताया है।
इन्होंने भी की कम उम्र में पीएचडी
पटना बिहार के निवासी तुलसी कुमार ने 21 साल के उम्र में पीएचडी हासिल की है। उन्होंने आइआइएससी से फिजिक्स विषय में पीएचडी की।
इसी तरह लखनऊ उत्तर प्रदेश की निवासी सुषमा वर्मा ने 15 वर्ष की आयु में पीएचडी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। सुषमा ने एनवायरमेंट माइक्रोबायोलाजी विषय पर पीएचडी की। सुषमा ने आठ साल की आयु में कक्षा दसवीं 10 साल की आयु में कक्षा बारहवीं एवं 12 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन कर लिया था।


किरण पिस्दा
किरण पिस्दा

किरण पिस्दा (जन्म 16 अगस्त 2001) एक भारतीय प्रोफेशनल फुटबॉलर हैं, जो इंडियन विमेंस लीग क्लब ओडिशा और इंडिया विमेंस नेशनल फुटबॉल टीम के लिए फॉरवर्ड के तौर पर खेलती हैं। वह इंडियन सीनियर नेशनल टीम के लिए खेलने वाली छत्तीसगढ़ की पहली खिलाड़ी हैं।

READ MORE


हमसे संपर्क करें

फेसबुक

ट्विटर

इंस्टाग्राम

अपना महत्वपूर्ण सुझाव हमसे साझा करें